अक्तूबर 2017

प्रतिभाशाली को समर्थन देने में सक्षम

टाटा परिवार की परोपकारी पहलों में से पहली, भारतीयों की उच्च शिक्षा के लिए जेएन टाटा एनडाउमेंट ने भारतीय विद्यार्थियों को 1892 से विश्व-स्तरीय शिक्षा हासिल करने में सहायता की है

जेएन टाटा स्कॉलर्स, जैसे कि उनको कहा जाता है, जीवन के सभी क्षेत्रों से आते हैं और विविध क्षेत्रों में अध्ययन करते हैं

एक सौ पच्चीस साल पहले, टाटा समूह के संस्थापक जमशेदपुर नुसेरवानजी टाटा ने भारतीय युवाओं — और कॉलोनाइज़्ड देश के भविष्य में — एक निवेश किया, जब उन्होने भारतीयों की उच्च शिक्षा के लिए जेएन टाटा एनडाउमेंट की स्थापना की।

टाटा परिवार की परोपकारी पहलों में पहली, इस एनडाउमेंट ने जाति या नस्ल के भेदभाव के बिना, भारतीय विद्यार्थियों को भारत के बाहर उच्च अध्ययन करने में सक्षम किया। यह कहना छोटी बात होगी कि इस निवेश ने लाभ दिया है: 1892 में अपनी स्थापना करने के बाद से जेएन टाटा एनडाउमेंट ने देश में प्रतिभाशाली दिमागों ने पीढ़ी दर पीढ़ी सपोर्ट किया है।

बीते बरसों में इस अग्रणी ऋण स्कॉलरशिप के लाभार्थियों में भूतपूर्व भारतीय राष्ट्रपति केआर नारायणन, वैज्ञानिक राजा रामन्ना और जयंत नार्लिकर, और प्रसिद्ध वायलन वादक मेहलि मेहता (ज़ूबिन मेहता के पिता) शामिल रहें हैं। यह एक निवेश है जिसने भारत और भारतीयों को भरपूर लाभ दिया है।

जमशेदजी’ का परोपकार का विचार, दान के परंपरागत व समकालीन विचारों से काफी भिन्न था। उन्होने इसे अपने शब्दों में समझाया: “हमारे बीच एक तरह का दान बहुत आम है... यह वो पैचवर्क परोपकार है जो बिना कपड़े वालों को कपड़ा देता है, गरीबों को आहार देता है और बीमारों को उपचार देता है। मैं गरीब या पीड़ित मनुष्य की सहायता करने वाली प्रवित्र भावना की निंदा नहीं कर रहा हूँ... [लेकिन] किसी राष्ट्र या समुदाय को जो चीज उन्नत बनाती है वह इसके सबसे कमजोर व निस्सहाय सदस्यों को संभालना नहीं है, बल्कि सर्वश्रेष्ठ और सबसे अधिक प्रतिभाशाली को ऊपर उठाना है, जिससे कि उनको देश की सर्वश्रेष्ठ सेवा में शामिल किया जा सके। ”

वास्तव में वह राष्ट्र निर्माण नाम का साझा धागा था जो जेएन टाटा एनडाउमेंट से लेकर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेस तक, भारत के पहले हाइड्रोइलेक्ट्रिक संयंत्र से लेकर देश के पहले स्टील इंटरप्राइस की स्थापना तक, जमशेदजी टाटा की सभी परोपकारी व व्यावसायिक पहलों से हो कर गुजरता था। इस ऋण स्कॉलरशिप के साथ उन्होने उस देश के लिए बौद्धिक पूंजी के निर्माण की इच्छा की जिसने स्वतंत्रता के सपने को देखना शुरु कर दिया था।

समय के साथ प्रतिष्ठा व कद में यह एनडाउमेंट जबरदस्त तरीके से बढ़ा। इस दिन तक, जेएन टाटा स्कॉलर के रूप में जाना, जाना उन विद्यार्थियों के विशिष्ट समुदाय के लिए गर्व का विषय है जो ऐसे बेहद प्रतिष्ठित लेबल को हासिल करने के पहले की चयन प्रक्रिया से हो कर गुजरते हैं। हर केवल थोड़े से अपने अध्ययन के क्षेत्र के सबसे अधिक प्रतिभाशाली जेएन टाटा स्कॉलर, दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शैक्षिक संस्थानों में विषयों की विविध श्रंखला में उच्चतर शिक्षा हासिल करने व शोध के लिए जाते हैं।

प्रतिष्ठा विशाल है

“आप’ जेएन टाटा एनडाउमेंट स्कॉलरशिप की प्रतिष्ठा के महत्व को तब तक नहीं समझते हैं जब तक आप विद्यार्थियों से खुद इसके बारे में नहीं सुनते हैं,” टीजे रविशेखरन, निदेशक, जेएन टाटा एनडाउमेंट बताते हैं। “ऐसे भी मौके आए हैं जब विद्यार्थियों ने पूरी फंडिंग हासिल की और उन्होने नाममात्र की राशि स्वीकार की क्योंकि वास्तव में वे जेएन टाटा स्कॉलर का लेबल हासिल करना चाहते थे। स्पष्ट रूप से, चयन प्रक्रिया को कठोर तो होना ही है — और ये है भी। ”

जेएन टाटा स्कॉलर, अपने हिस्से में गहन रूप से ये जानते हैं यह स्कॉलरशिप दुनिया भर के अवसर खोलती है जो तात्कालिक अकादमिक सपोर्ट से कहीं अधिक है। महत्वपूर्ण रूप से, यह उनको प्रतिष्ठित अल्युमुनि नेटवर्क तक पहुंच प्रदान करता है जिसमें जीवन के अनेक हिस्सों से लीडर, प्रभावशाली हस्तियां शामिल हैं।

“एक ऐसे जत्थे में शामिल होना जबरदस्त गर्व की बात है जो एक कठोर चयन प्रक्रिया से होकर गुजरता है,” डॉ रामास्वामी बालासुब्रामणियम, जेएन टाटा स्कॉलर बताते हैं जो लीडरशिप, संगठनात्मक विकास और सार्वजनिक नीति के अध्ययन के लिए 2009 हार्वर्ड गए। “पॉलिसी व एडवोकेसी में मेरे काम में बहुत सी चर्चा और विचारों का विनियम शामिल होता है; जेएन टाटा अल्युमनस होने से मुझे उच्च क्षमता वाले लोगों को तैयार नेटवर्क हासिल होता है जिनसे मैं बात कर सकता हूँ और संवाद कर सकता हूँ।”

हाल के दिनों में, इस इन्डाउमेंट ने ऐसे विद्यार्थियों की संख्या में उभार देख है जो अध्ययन के नए क्षेत्रों में काम करना चाहते हैं और इन नए क्षेत्रों में मशीन लर्निंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा साइंस, पर्यावरण इंजीनियरिंग तथा बायोमेडिकल डिवाइस डिजाइन शामिल हैं। कुछ दूसरे भी हैं जिन्होने कम परंपरागत अध्ययन क्षेत्र चुने हैं, जैसे रिवर-बेसिन मैनेजमेंट, क्रिएटिव राइटिंग और यहां तक कि ‘थेरेपी के रूप में नृत्य’।

श्री रविशंकर को हालांकि एक दुख है। “विद्यार्थियों की बड़ी संख्या ’ अच्छी तरह से सूचित निर्णय नहीं ले रहे हैं। वे मीडिया के गहन शोर से प्रभावित हो रहे हैं और ऐसे विषयों को चुन रहे हैं जो उनके लिए वास्तव में सर्वश्रेष्ठ नहीं हैं। हम उनके लिए कुछ करने का इरादा रखते हैं। हमें’ नहीं पता कि यह किस प्रारूप में होगा, लेकिन हम निश्चित रूप से इसके बारे में कुछ करने की योजना बना रहे हैं।”

यह चाहे जैसा हो, इस इनडाउमेंट के प्रभाव के घनत्व पर कोई असर नहीं है। आखिरकार, इसके मूल्य’ और क्रेडेन्शियल्स को शोकेस करने के लिए सवा सौ सालों का साक्ष्य इसके साथ है।

दुनिया का विकास कर रहा है, रिया सेन

यूवा, फिजी में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के प्रशांत कार्यालय में रिपोर्टिंग व संचार विशेषज्ञ के रूप में, रिया सेन अंतरराष्ट्रीय विकास कार्य के बीच होने के अपने सपने को जी रही हैं। अंग्रेजी ऑनर्स करने के बाद, सुश्री सेन ने जेन टाटा एनडाउमेंट स्कॉलरशिप के लिए आवेदन किया, जो विकास संचार का अध्ययन करने के इच्छुक विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप पेश करने वाले बेहद कम संगठनों में से एक है। इस स्कॉलरशि ने उनको लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (एलएसई) में कम्युनिकेशन्स एंड डवलपमेंट में डिग्री करने में उनको सक्षम किया। वह केवल शुरुआत थी। एलएसई से निकलने के बाद, सुश्री सेन ने अंतरसरकारी व अंतरराष्ट्रीय संगठनों जैसे यूरोपीय यूनियन व संयुक्त राष्ट्र संघ के साथ बेल्जियम, थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम में अपने असाइनमेंट किए और अब फिजी में काम कर रही हैं। "जेएन टाटा व टाटा ट्रस्ट का फलसफा मेरा बस एक तार छेड़ने का था," वे कहती हैं। "परिवर्तन को प्रभावित करने का टाटा का फलसफा व तरीका कुछ ऐसा था जिसे मैं अपने जीवन के हर क्षेत्र में शामिल करना चाहती थी। किसी विचार या किसी सपने में विश्वास, श्रद्धा व आस्था, विशेष रूप से जब युवा आकांक्षियों से आती है तो यह वास्तव में वौद्धिक पूंजी का निर्माण करती है। युवा के रूप में यह हमें सपने देखने में, सीमाओं व बाधाओं को परे धकेलने के लिए, सीमाओं की परीक्षा लेने और नई सीमाओं तक पहुंचने के लिए प्रेरित करता है।"

नीति केन्द्रित लोग, डॉ रामास्वामी बालासुब्रामणियम

जब उन्होने 2009 में जेएन टाटा एनडाउमेंट स्कॉलरशिप के लिए आवेदन किया था तो डॉ रामास्वामी बालासुब्रामणियम के पास पहले ही प्रभावशाली डिग्रियों की सूची थी, जिसमें एमबीबीएस तथा हॉस्पिटल मैनेजमेंट में एमफिल शामिल थे। उनके पास जमीनी स्तर पर काम करने का भी काफी प्रेरणाप्रद कार्य अनुभव था, उन्होने स्वामी विवेकानंद यूथ मूवमेंट की तब स्थापना की थी जब वे 19 वर्ष के थे। डॉ बालासुब्रामणियम का कर्नाटक के उपेक्षित आदिवासी समुदायों के साथ किए गे काम ने उनको विकास के समकालीन व्याख्यान की एक मजबूत आवाज के रूप में स्थापित किया है। जेएन टाटा स्कॉलरशिप के साथ, उन्होने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से सार्वजनिक नीति व एडवोकेसी में एक कोर्स किया जिससे कि वे विकास पर राष्ट्रीय नीति को प्रभावित करने के लिए जरूरी कौशल हासिल कर सकें। "यह एनडाउमेंट एक राष्ट्र-निर्माण प्रोग्राम है; यह स्कॉलरों को अधिक सशक्त हो वापस आने व राष्ट्र के लिए काम करने में सक्षम करता है," वे कहते हैं। हार्वर्ड से लौटने के बाद, डॉ बालासुब्रामणियम ने ग्रासरूट रिसर्च एंड एडवोकेसी मूलवेंट की स्थापना की जो जमीनी दृष्टिकोण के साथ विकास नीति निर्माण पर काम करता है। "नीति ऊपर से नीचे नहीं हो सकती है, इसे वास्तविक व अर्थपूर्ण होने के लिए नीचे से ऊपर की ओर की दिशा में होना" चाहिए। इस भले डॉक्टर के एजेंडा में अगली चीज सार्वजनिक नीति को पढाने के लिए एक स्कूल है जो उनके इरादे व आशाओं में सटीक बैठता है।