अगस्त 2017

जागो रे 2.0 के साथ भारत को जगाते हैं टाटा टी

जागो रे अभियान की सफलता के बाद टाटा टी ने जागो रे 2.0 शुरू किया जिसका लक्ष्य है लैंगिक संवेदनशीलता जगाना और दुर्भाग्यकारी घटनाओं को रोकना। टाटा ग्लोबल बेवरीजेज के क्षेत्रीय अध्यक्ष सुशांत दाश – अभियान, उसके उद्देश्यों और भविष्य की कार्ययोजना के बारे में बताते हैं

‘जागो रे’ ने कैसे टाटा टी को एक मूल्य आधारित ब्रांड की छवि मजबूत करने में मदद की।
टाटा टी जागो रे को समाज सुधार के अभियान के रूप में देखा गया जबकि टाटा समूह के सिद्धांतों के अनुरूप व्यावसायिक उद्देश्य भी पूरे किए गए। टाटा टी के अंतर्गत हमारे पास चार विशिष्ट ब्रांड हैं – टाटा टी प्रीमियम, टाटा टी अग्नि, टाटा टी गोल्ड और टाटा टी लाइफ - प्रत्येक अपनी-अपनी खास पहचान के साथ। हमारा प्राथमिक उद्देश्य था मार्केटिंग बजट को अपने सब-ब्रांड तक विस्तारित करना और टाटा ब्रांड की इक्विटी का लाभ उठाकर श्रेणी में चिंतन नेतृत्व का सृजन करना

हालांकि, चुनौती यह थी कि कैसे अपने विभिन्न ब्रांडों को एक समेकित पोजिशनिंग प्लेटफॉर्म के तहत लाना। साथ ही, हम युवाओं की दुनिया में भी प्रवेश चाहते थे और ब्रांड को इस तरह उतारना चाहते थे कि यह उनके साथ मजबूती से जुड़े और साथ ही हमारी छवि अपने प्रतिस्पर्धियों से अलग बने। इसप्रकार, जागो रे की अवधारणा के साथ, जबकि यह कैटगरी चाय की क्रियात्मक खूबियों की चर्चा करती थी, टाटा टी ने दायरे के बाहर कदम बढ़ाते हुए एक अदना सी चाय की प्याली की भूमिका को ‘जगाने वाले’ पेय की स्थिति से आगे ले जाकर लोगों के जीवन में ‘सामाजिक जागरण’ का माध्यम बनाया।

जागो रे ने कैसे सामाजिक बदलाव का काम किया और इस अभियान की भावी कार्ययोजना क्या है?
टाटा टी जागो रे की शुरुआत 2008 में हुई थी, जिसने ‘हर सुबह सिर्फ उठो मत’ अभियान के साथ सामाजिक मुद्दों से लोगों को रू-ब-रू कराया। जागो रे (हर सुबह केवल नींद से जगें नहीं, जाग्रत बनें!)। फिर हमने अभियान को आगे बढ़ाया और अपने वोटिंग अभियान के जरिए लोगों को यह समझाते हुए कि बदलाव लाना खुद उनके अपने हाथों में है, एक जन आंदोलन की रचना की।

2014 में हमारे अंतिम अभियान पावर ऑफ 49 का लक्ष्य था भारतीय महिलाओं को उनकी शक्ति का अहसास कराना क्योंकि कुल जनसंख्या का 49 प्रतिशत होकर सरकार बनाने या गिराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

जागो रे ने पूरी उदासीनता की स्थिति में बदलावा लाया और आज हम एक ऐसे राष्ट्र के रूप में जो चीजों के गलत होने पर अपनी आवाज उठाता है। लेकिन ज्यादातर यह ‘सक्रियता’ तब दिखाई पड़ती है जब कोई आपदा या मुसीबत आती है। जागो रे 2.0 के साथ हमें इस ‘पुनर्सक्रियता’ वाले व्यवहार को बदलकर ‘पूर्व-सक्रियता’ – यानी अनचाही परिस्थिति को आने से रोकने की सक्रियता लाने की उम्मीद है। ‘पूर्व-सक्रियता’ की धारणा एक नया आयाम– है जो संस्कृति में नहीं, बल्कि किसी सृजन में अभिव्यक्त होता है।

वर्षों से टाटा टी जागो रे ने केवल सामाजिक मुद्दों के बारे में ही बात नहीं की है बल्कि चर्चा को आगे बढ़ाकर और बदलाव लाने का सही प्रयास कर परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त किया है। पावर ऑफ 49 अभियान ने हमें भारत में महिलाओं की समस्याओं का सबसे बड़ा रिपोजिटरी बनाने में की सुविधा दी है जहां आठ लाख से भी अधिक समस्याएं प्राप्त हुई हैं। फिर सरकार को सौंपा जाने वाला प्रथम क्राउड-सोर्स्ड मेनिफेस्टो का आधार बना। इसके अलावा, हमारे वोटिंग अभियान में जागो रे वेबसाइट पर छह लाख रजिस्ट्रेशन हुए।

हमने सामाजिक परिवर्तन पर वार्ता की और नए संदर्भ के साथ सामयिक सामाजिक मुद्दे प्रस्तुत किए। हमारे कार्य ने हमेशा लोगों को यह समझाने का प्रयास किया है कि बदलाव की शुरुआत उनसे होती है और हर बार हमने यह उस बदलाव में मदद की है।

जागो रे 2.0 अभियान के पूर्व अवतार से कैसे अलग है?
पूर्व के विपरीत, आज लोग समाजिक मुद्दों के प्रति अधिक जागरुक और चौकस हैं। चीजों के गलत होने पर आवाजें बुलंद होती हैं। लोग सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हैं। लेकिन अक्सर यह अप्रिय के घटित होने के बाद दिखाई पड़ता है। इसलिए, हमने महसूस किया है कि हमें पुनर्सक्रियता के खोल को तोड़ना है और बदलाव की नई संस्कृति लानी है।

इस तरह ‘पूर्व-सक्रियता’– यानी अनचाही परिस्थिति को आने से रोकने की सक्रियता की अवधारणा के आधार पर जागो रे 2.0 की अवधारणा तैयार हुई। पूर्व-सक्रियता किसी एक मुद्दे पर फोकस नहीं करता है बल्कि व्यावहारिक बदलाव लाने के परिचित उदाहरणों के रूप में अनेक मुद्दों पर ध्यान देता है।

‘अलार्म बजने से पहले जागो रे’ अभियान की शुरुआत करने के बाद और पूर्व-सक्रियता की अवधारणा का बीजारोपण के बाद फेज II के साथ हमारा लक्ष्य है लोगों को समय पूर्व कार्य करने के लिए प्रेरित करना और महिला सुरक्षा तथा भारत में खेल भावना की कमी जैसे मुद्दों पर आवेदनों पर हस्ताक्षर के जरिए इस बदलाव का हिस्सा बनना। इस आवेदन का लक्ष्य है विद्यालयी शिक्षा में लैंगिक जागरुकता संबंधी पाठ्यक्रम अनिवार्य कर तथा स्कूलों में खेल को अनिवार्य विषय बनाकर जमीनी स्तर पर दो मुद्दों से निबटना।

हस्ताक्षर के बाद इन आवेदनों को नीतिगत स्तर पर बदलाव लाने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय को सौंपा जाएगा। लेकिन अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि – लोगों को अपने बच्चों को लैंगिक संवेदनशीलता अपनाने के लिए शपथ दिलाकर और बच्चों को स्थानीय खेल कार्यक्रमों में ले जाकर – हम लोगों को परिवर्तन के लिए प्रेरित करें ताकि यह बदलाव उनके अपने घरों और पड़ोस में लाया जा सके। लोगों से संवाद के लिए हम डिजिटल मीडिया के साथ विभिन्न मंचों के जरिए लोगों तक पहुंच रहे हैं। व्यवहारमूलक बदलाव लाने के लिए विभिन्न शहरों और महानगरों में लिंग-संवेदनशीलता कार्यक्रम चलाने के लिए हमने NGO के साथ साझेदारी की है।

फेज III में हम ब्रांड के रूप में अपनी आवधारणाओं को क्रियात्मक रूप देंगे और आगे इस व्यावहारिक बदलाव को जमीनी कार्य करते हुए मूर्त रूप प्रदान करेंगे और ग्राहकों के व्यापक समूह तक पहुंचेंगे।

अभियान की सफलता में डिजिटल माध्यम ने किस प्रकार योगदान दिया है?
टाटा टी जागो रे के साथ, ब्रांड की विश्वसनीयता के निर्माण के लिए और संबंधित ग्राहक संपर्क केंद्रों में ‘पूर्व-सक्रियता’ की भावना भरने के लिए डिजिटल माध्यमों ने प्रभावी काम किए।

जब हमने जागो रे 2.0 की शुरुआत की तो विश्वसनीयता और पहुंच के बीच संतुलन सुनिश्चित करने के लिए हमने एक देशी प्रथम सामग्री अभिगम अपनाया। इसमें शामिल हैं सही समय पर, सही मंच पर सही संदेश देने के लिए प्रभावकों और चिंतकों, प्रकाशन मंचों, सोशल ब्लॉग्स और मीडिया साझेदारों साथ सहयोग करना। जागो रे 2.0 के फेज I के लिए हमारी डिजिटल साझेदारी के कुछ उदाहरणों में हैं शामिल हैं वरुण पृथी, वीरेंद्र सहवाग और ज्वाला गट्टा के साथ साझेदारी और सोशल पब्लिशर्स लॉजिकल इंडियन, स्टोरी पिक और कंटेंट/मीडिया पार्टनर जागरण और हिंदुस्तान टाइम्स के साथ साझेदारी।

फेज I के दौरान डिजिटल के प्रति हमारे खास अभिगम ने हमें निम्नलिखित की प्राप्ति में मदद की:

  • डिजिटल मंचों पर 1.15 अरब इंप्रेशन।
  • 14.4 करोड़ विशिष्ट यूजर्स की एक डिजिटल पहुंच।
  • 14.4 करोड़ में हमने संघटित रूप से 4.4 करोड़ (30.5%) लोगों तक पहुंच बनाई।
  • वीडियो (TVC + डिजिटल वीडियो) 6.7 करोड़ के नजरिए।
  • ट्विटर पर लॉन्च हुए TVC को रिकॉर्ड तोड़ 49% एंगेजमेंट मिले।
  • कंटेंट ने सभी मंचों पर 39,000 संवादों के होने में मदद की, जो हमारे कंटेंट और आइडिया के साथ बड़ी संख्या में ग्राहकों के जुड़ने को दर्शाता है।

 

रणनीतिक योजना कंटेंट निर्माण के जरिए हमने डिजिटल मीडिया को एक महत्वपूर्ण मंच बनाया जिसके जरिए हम जागो रे के लिए अपने ग्राहकों के साथ संवाद करते हैं और फेज II और फेज III में इस लहर को जारी रखेंगे।

जारो रे अभियान की मुख्य उपलब्धियां क्या रहीं?
फेज I एक बड़ी सफलता थी और इसमें डिजिटल मंचों पर 1.15 अरब से अधिक इम्प्रेशन मिले और हमारी पहुंच 14.4 करोड़ विशिष्ट प्रयोक्ताओं तक हुई। अब तक, हमारे कंटेंट ने सभी मंचों पर 39,000 संवादों के होने में मदद की, जो हमारे कंटेंट और कोर आइडिया के साथ बड़ी संख्या में ग्राहकों के जुड़ने को दर्शाता है।

फेज II में, हम 10 लाख प्री-एक्टिविस्ट बनाने के लिए बढ़ चुके हैं। हमें अपने लैंगिक संवेदनशीलता के मुद्दे पर 10 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। यह अत्यंत उत्साहवर्धक है क्योंकि यह इस तथ्य का साक्ष्य है कि लोग पूर्व-सक्रियता की तत्काल आवश्यकता से सहमत हैं और एक सुरक्षित तथा बेहतर भारत के निर्माण के लिए कार्यरत हैं।