मई 2017 | कल्पना शाह

एक नई बुनाई

टाइटन कंपनी का नवीनतम रिटेल एडवेंचर तनेरा, संस्कृति व शिल्प को मिलाता करता है और साड़ी की कहानी बताता व बेचता है। इस कंपनी के बेंगालुरू के नए स्टोर में भारत के 20 विभिन्न राज्यों की साड़ियां उपलब्ध हैं

टाइटन कंपनी के बारे में कुछ ऐसा है जो इसे अपनी अर्जित ख्याति पर आराम करने से रोकता है। नए क्षेत्रों की खोज और विस्तार की इच्छा, उचित लगन के साथ व अनुचित जटिलताओं के बिना, इसे एक ऐसा इंटरप्राइस बनाता है जो घड़ियों, आभूषणों एसेसरीज़ व चश्मों के क्षेत्र में इसकी उपस्थिति को प्रतिष्ठित करता है। टाइटन ने अब एथेनिक-वस्त्र व्यापार का स्वाद लेने का निर्णय लिया है।

एथनिक बुनाई व वस्त्रों में भारत की समृद्ध परंपरा में शामिल होना टाइटन की प्राकृतिक प्रगति जैसा प्रतीत होता है। यह इशके नवीनतम वेंचर तनेरा का आधार है जो इस देश की सांस्कृतिक जमीनों से हासिल किए गए वस्त्रों के बारे में है। इस संग्रह में शामिल नगीना साड़ी है जो चिरस्थायी है व अनुग्रह और शान का विशिष्ट प्रतीक है।

पहला तनेरा स्टोर बेंगालुरू के इंदिरा नगर में रीमॉडल किए गए विला में स्थित है जिसने हाल ही में व्यापार के लिए अपने दरवाजे खोले हैं। साड़ियां यहां का मुख्य आकर्षण हैं। वे देश के 20 भिन्न-भिन्न राज्यों से आती है, इनमें से प्रत्येक हाथ से बुने हैं और उनको कॉटन, सिल्क व लिनेन जैसे प्राकृतिक रेशों से बनाया गया है।

वाराणसी से कांचीपुरम - लूम हर जगह है

  • जबकि पारंपरिक बुनाई बुनियाद में बनी रहेगी, यह स्टोर विभिन्न पसंदों के अनुकूल डिजाइन के लिए समकालीन दृष्टिकोण को भी अपना रहा है
  • ये बनारसी जॉर्जेट साड़ियां बनारसी सिल्क की तुलना में कम व्यापक रूप से जानी जाती हैं। इन साड़ियों के उपलब्ध रंग आम तौर पर असामान्य पेस्टल रंग होते हैं जो सामग्री के अनुकूल होते हैं।
  • सिल्क, कॉटन तथा लिनेन वाली बंगाली साड़ियां, तनेरा में मिल सकती है। विशिष्ट मुस्लिन जमदानी जो अंगूठी से निकल जाती है इस स्टोर के चुनिंदा संग्रह में शामिल है।
  • पश्चिमी या फ्यूज़न पहनावे को पारंपरिक एहसास देने की इच्छा रखने वाले खरीदारों के बीच स्टोल काफी लोकप्रिय हैं।
  • ग्राहक बनारसी साड़ियों की बेहतरीन बुनाई को पसंद करते हैं
  • गुजरात की अजराख बनाने में काफी मेहनत और समय लगता है। इस प्रक्रिया में कीचड़ व प्राकृतिक डाई जैसी भिन्न-भिन्न सामग्रियों के साथ फैब्रिक की धुलाई व छपाई के अनेक चरण शामिल होते हैं।
  • तनेरा की पूरी टीम को विभिन्न फैब्रिक्स की बारीकियों की जानकारी है। इन-हाउस डिजाइनर आपको कस्टम मेड गारमेंट या साड़ी डिजाइन करने में आपकी सहायता कर सकते हैं

तनेरा टीम ने भारत की सभी दिशाओं में घूम-घूम कर एक बेहतरीन संग्रह को एक छत के नीचे लाती है जिसमें आसाम से मूंगा; चेट्टिनाड से कॉटन; भागलपुर से सिल्क; गुजरात, आंध्र प्रदेश व उड़ीसा से इकात; लखनऊ से चिकनकारी; बनारसी सिल्क व कांजीवरम; और गुजरात से पाटन पटोला जैसे हेयरलूम व बंगाल से जमदानी शामिल हैं।

आकर्षित करने वाले मूल्य

ये स्टोर लहंगा, स्टोल्स, पहनने को तैयार ब्लाउज़ और किसी भी तरह के वस्त्र बनाने के लिए विशिष्ट थान वालेल कपड़े भी बेचता है। मूल्यों को उपभोक्ताओं के सबसे संभव व्यापक आधार को आकर्षित करने के लिए कैलिबरेट किया गया है, जिसमें साड़ी का मूल्य रु.2000 से रु.2,50,000 (पाटन पटोला संस्करण के लिए) शामिल है।

दूसरा तनेरा स्टोर जल्दी ही बेंगालुरू के जयनगर क्षेत्र में खुलने के लिए तैयार है और यह कंपनी पूरे देश में प्रदर्शनियों को शुरु करने की तैयारी की प्रक्रिया में है जिससे ग्राहकों के बीच इस नए ब्रांड का विस्तार हो सके।

तनेरा में साड़ी को केन्द्र में रखने के विचार के पीछे एक स्पष्ट तर्क है। "महिलाओं को देश के हर हिस्से से साड़ियों को रखना पसंद होता है," तनेरा के बिजनेस हेड, श्यामला रमनन कहती हैं। "यदि आपके पास पहले से बंधानी है तो आप एक इकात या साउथ इंडियन कॉटन रखना चाहेंगी। यह सूची अंतहीन है।"

सुश्री रमनन, जो अपने बॉस से अपने काम के हिस्से के रूप में वस्त्र अलाउन्स मांगने के बारे में जोक करती हैं, इस विशिष्ट स्टोर में खरीदारी के आनंद के बारे में बताती हैं। "तनेरा का उद्देश्य विभेदीकृत रिटोल अनुभव प्रदान करना है। यह एक ऐसा स्थान है जहां पर ग्राहक फैब्रिक की शुद्धता को छू व महसूस कर सकते हैं तथा इसके बनाने में लगे क्राफ्ट की प्रशंसा कर सकते हैं।" तनेरा जो कुछ प्रस्तुत करती है वह कई मायनों में विशिष्ट है। उदाहरण के लिए पहली बार में कोई चीज नहीं खरीदते हैं लेकिन वापसी पर अपना मन बदल सकते हैं, और पाते हैं कि वह चीज अब उपलब्ध नहीं है।

जबकि इसे शुरु करने से पहले कोई टेस्ट मार्केटिंग नहीं की गयी है, तनेरा ने इस साल की शुरुआत में बेंगालुरू के ताज वेस्टएंड में 'ट्रक शो' किया था। इस समय तक इस व्यापार के लिए विज़न स्थापित हो चुका था। "हम ऐसे उत्पादों को बनाना चाहते थे जो ना केवल ग्राहकों के लिए बल्कि उद्योग के लिए भी मूल्य वर्धन करें," टाइटन कंपनी में रणनीति व व्यापार इन्क्यूबेशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष, अजय चावला कहते हैं।

साड़ी बनाने का व्यापार अधिकांशतः अव्यवस्थित है। तनेरा के उद्देश्यों में इस व्यापार के तरीकों को बदलना भी शामिल है। यह ब्रांड इस समय भारत में सक्रिया 400 बुनकर क्लस्टरों में 20 के साथ काम करता है (मास्टर बुनकर या स्टूडियो के साथ बुनकरों का समूह)।

यह समुदाय कनेक्ट, भारत के भीतरी हिस्सों में बुनकरों के साथ सुश्री रमनन के संवादों के दौरान संभव हुए। बंगाल के एक बुनकर ने उनसे पूछा कि टाटा को इस व्यापार में आने में इतना समय क्यो लग गया। सुश्री रमनन ने कहा, "उसने कहा कि उसे बुनाई करते खुशी होगी अगर शहर में जाकर आजीविका खोजने की बजाय अगर वह गांव में रहते हुए काम कर सके और अपने परिवार को सहारा दे सके।"

महिलाओं द्वारा क्राफ्ट किया गया

सुश्री रमनन एक और घटना याद करती है, जो कि तेलंगाना के पोचमपल्ली से है। उनको वहां पर एक बुनकर समूह मिला जिसमें शामिल लगभग सभी सदस्य युवा महिलाएं थी। ऐसा इसलिए था क्योंकि अधिकांश पुरुष काम की तलाश में शहरी भारत चले गए थे। इसलिए महिलाओं ने इस कला को सीखा और अतिरिक्त आय कमाने का तरीका हासिल कर लिया। "युवा महिलाओं को इयरफोन लगाकर नवीनतम संगीत सुनते हुए लूम पर काम करते हुए देखना एक बेहतरीन एहसास था," वे बताती हैं।

तनेरा के लक्ष्यों में से एक शिल्प व डिज़ाइन की परंपरा को पुनर्जीवित करना भी शामिल है। लोकिन जबकि परंपरागत डिजाइन बुनियाद में रहती है, एक समकालीन एहसास युवा खरीदारों में ताजी सोच वाले ब्रांड की अपील को विस्तार प्रदान करता है। मास्टर बुनकर, बुनकर सोसाइटी, डिज़ाइन तथा स्टूडियो टाइटन इस वेंचर में शामिल है और नए व पुराने को मिलाने के इस अवसर के बारे में उत्साहित है।

"हमे एक लंबी दूरी तय करनी है," सुश्री रमनन कहती हैं। यह एक ऐसी यात्रा है जो तनेरा और इससे जुड़े प्रत्येक व्यक्ति के लिए ज्ञानप्रद और पुरस्कृत करने वाली है।